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Saturday, March 11, 2017

इस दुनिया का सब से शक्तिशाली इंसान कौन है ???

बूढ़ा पिता अपने IAS बेटे के चेंबर में  जाकर उसके कंधे पर हाथ रख कर खड़ा हो गया !

और प्यार से अपने पुत्र से पूछा...

"इस दुनिया का सबसे शक्तिशाली इंसान कौन है"?

पुत्र ने पिता को बड़े प्यार से हंसते हुए कहा "मेरे अलावा कौन हो सकता है पिताजी "!

पिता को इस जवाब की  आशा नहीं थी, उसे विश्वास था कि उसका बेटा गर्व से कहेगा पिताजी इस दुनिया के सब से शक्तिशाली इंसान आप हैैं, जिन्होंने मुझे इतना योग्य बनाया !

उनकी आँखे छलछला आई ! वो चेंबर के गेट को खोल कर बाहर निकलने लगे !

उन्होंने एक बार पीछे मुड़ कर पुनः बेटे से पूछा एक बार फिर बताओ इस दुनिया का सब से शक्तिशाली इंसान कौन है ???

पुत्र ने  इस बार कहा

       "पिताजी आप हैैं, इस दुनिया के सब से शक्तिशाली इंसान "!

पिता सुनकर आश्चर्यचकित हो गए उन्होंने कहा "अभी तो तुम अपने आप को इस दुनिया का सब से शक्तिशाली इंसान बता रहे थे अब तुम मुझे बता रहे हो " ???

पुत्र ने हंसते हुए उन्हें अपने सामने बिठाते  हुए कहा

"पिताजी उस समय आप का हाथ मेरे कंधे पर था, जिस पुत्र के कंधे पर या सिर पर पिता का हाथ हो वो पुत्र तो दुनिया का सबसे शक्तिशाली इंसान ही होगा ना,,,,,

बोलिए पिताजी"  !

पिता की आँखे भर आई उन्होंने अपने पुत्र को कस कर के अपने गले लग लिया !

      सदैव बुजुर्गों का सम्मान करें!!!!

Sunday, March 5, 2017

भगवान की अनमोल देंन हैं ये बेटियां

_पापा देखो मेंहदी वाली_
      ••••••••••••••••••

मुझे मेंहदी लगवानी है

"पाँच साल की बेटी बाज़ार में बैठी मेंहदी वाली को देखते ही मचल गयी...

"कैसे लगाती हो मेंहदी "पापा नें सवाल किया...

"एक हाथ के पचास दो के सौ ...?

मेंहदी वाली ने जवाब दिया.

पापा को मालूम नहीं था मेंहदी लगवाना इतना मँहगा हो गया है.

"नहीं भई एक हाथ के बीस लो वरना हमें नहीं लगवानी."

यह सुनकर बेटी नें मुँह फुला लिया.

"अरे अब चलो भी ,नहीं लगवानी इतनी मँहगी मेंहदी"

पापा के माथे पर लकीरें उभर आयीं .

"अरे लगवाने दो ना साहब..अभी आपके घर में है तो आपसे लाड़ भी कर सकती है...

कल को पराये घर चली गयी तो पता नहीं ऐसे मचल पायेगी या नहीं. तब आप भी तरसोगे बिटिया की फरमाइश पूरी करने को...

मेंहदी वाली के शब्द थे तो चुभने वाले पर उन्हें सुनकर पापा को अपनी बड़ी बेटी की याद आ गयी..?

जिसकी शादी उसने तीन साल पहले एक खाते -पीते पढ़े लिखे परिवार में की थी.

उन्होंने पहले साल से ही उसे छोटी छोटी बातों पर सताना शुरू कर दिया था.

दो साल तक वह मुट्ठी भरभर के रुपये उनके मुँह में ठूँसता रहा पर
उनका पेट बढ़ता ही चला गया और अंत में एक दिन सीढियों से
गिर कर बेटी की मौत की खबर ही मायके पहुँची.

आज वह छटपटाता है कि उसकी वह बेटी फिर से उसके पास लौट आये..?

और वह चुन चुन कर उसकी सारी अधूरी इच्छाएँ पूरी कर दे...

पर वह अच्छी तरह जानता है कि अब यह असंभव है.

"लगा दूँ बाबूजी...?,

एक हाथ में ही सही "

मेंहदी वाली की आवाज से पापा की तंद्रा टूटी...

"हाँ हाँ लगा दो. एक हाथ में नहीं दोनों हाथों में.

और हाँ, इससे भी अच्छी वाली हो तो वो लगाना."

पापा ने डबडबायी आँखें पोंछते हुए कहा और बिटिया को आगे कर दिया.

जब तक बेटी हमारे घर है उनकी हर इच्छा जरूर पूरी करे,क्या पता आगे कोई इच्छा पूरी हो पाये या ना हो पाये ।

ये बेटियां भी कितनी अजीब होती हैं जब ससुराल में होती हैं तब माइके जाने को तरसती हैं।

सोचती हैं कि घर जाकर माँ को ये बताऊँगी पापा से ये मांगूंगी बहिन से ये कहूँगी भाई को सबक सिखाऊंगी और मौज मस्ती करुँगी।

लेकिन जब सच में मायके जाती हैं तो एकदम शांत हो जाती है किसी से कुछ भी नहीं बोलती बस माँ बाप भाई बहन से गले मिलती है। बहुत बहुत खुश होती है।भूल जाती है कुछ पल के लिए पति ससुराल।

क्योंकि

एक अनोखा प्यार होता है मायके में एक अजीब कशिश होती है मायके में।ससुराल में कितना भी प्यार मिले माँ बाप की एक मुस्कान को तरसती है ये बेटियां।

ससुराल में कितना भी रोएँ पर मायके में एक भी आंसूं नहीं बहाती ये बेटियां

क्योंकि

बेटियों का सिर्फ एक ही आंसू माँ बाप भाई बहन को हिला देता है रुला देता है।

कितनी अजीब है ये बेटियां कितनी नटखट है ये बेटियां भगवान की अनमोल देंन हैं ये बेटियां

हो सके तो बेटियों को बहुत प्यार दें उन्हें कभी भी न रुलाये क्योंकि ये अनमोल बेटी दो परिवार जोड़ती है दो रिश्तों को साथ लाती है।

अपने प्यार और मुस्कान से।

हम चाहते हैं कि सभी बेटियां खुश रहें हमेशा भले ही हो वो मायके में या ससुराल में।

खुशकिस्मत है वो जो बेटी के बाप हैं, उन्हें भरपूर प्यार दे, दुलार करें और यही व्यवहार अपनी पत्नी के साथ भी करें क्यों की वो भी किसी की बेटी है और अपने पिता की छोड़ कर आपके साथ पूरी ज़िन्दगी बीताने आयी है।  उसके पिता की सारी उम्मीदें सिर्फ और सिर्फ आप से हैं।

अगर ये पोस्ट दिल को छु गया हो तो और लोगों के साथ शेयर करें। ये पोस्ट समर्पित है हर नारी को.

Saturday, February 11, 2017

प्रेरक कथा

"प्रेरक कथा"

एक मित्र नेअपनी बीवी की अलमारी खोली और एक सुनहरे कलर का पेकेट निकाला,

उसने कहा कि
"ये कोई साधारण पैकेट नहीं है..!"

उसने पैकेट खोला
और उसमें रखी बेहद खूबसूरत सिल्क की साड़ी और उसके साथ की ज्वेलरी को एकटक देखने लगा।

ये हमने लिया था 8-9 साल पहले, जब हम पहली बार न्युयार्क गए थे,
परन्तु उसने ये कभी पहनी नहीं क्योंकि वह इसे किसी खास मौके पर पहनना चाहती थी,
और इसलिए इसे बचा कर रखा था।

उसने उस पैकेट को भी दूसरे और कपड़ों के साथ अपनी बीवी की अर्थी के पास रख दिया,
उसकी बीवी की मृत्यु अभी अचानक ही हुई थी।

उसने रोते हुए मेरी और देखा और कहा-
किसी भी खास मौके के लिए कभी भी कुछ भी मत बचा के रखना,
जिंदगी का हर एक दिन खास मौका है,
कल का कुछ भरोसा नहीं है।

मुझे लगता है,
उसकी उन बातों ने मेरी जिंदगी बदल दी।

मित्रों अब मैं किसी बात की ज्यादा चिंता नहीं करता,

अब मैं अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताता हूँ,
और काम का कम टेंशन लेता हूँ।

मुझे अब समझ में आ चुका है कि जिंदगी जिंदादिली से जीने का नाम है,
डर-डर के,
रूक-रूक के बहुत ज्यादा विचार करके चलने में समय आगे निकल जाता है,
और हम पिछड़ जाते हैं।

अब मैं कुछ भी बहुत बहुत संभाल-संभाल के नहीं रखता, हर एक चीज़ का बिंदास और भरपूर उपयोग जी भर के करता हूँ।

अब मैं घर के शोकेस में रखी महँगी क्रॉकरी का हर दिन उपयोग करता हूँ..

अगर मुझे पास के सुपर मार्केट में या नज़दीकी माॅल में मूवी देखने नए कपड़े पहन के जाने का मन है,
तो मैं जाता हूँ।

अपने कीमती खास परफ्यूम को विशेष मौकों के लिए संभाल कर बचा के नहीं रखता,
मैं उन्हें जब मर्जी आए तब उपयोग करता हूँ,

'एक दिन'
'किसी दिन'
'कोई ख़ास मौका' जैसे शब्द अब मेरी डिक्शनरी से गुम होते जा रहे हैं..।

अगर कुछ देखने,
सुनने या करने लायक है,
तो मुझे उसे अभी देखना सुनना या करना होता है।

मुझे नहीं पता मेरे दोस्त की बीवी क्या करती,
अगर उसे पता होता कि वह अगली सुबह नहीं देख पाएगी,

शायद वह अपने नज़दीकी रिश्तेदारों और खास दोस्तों को बुलाती।
शायद वह अपने पुराने रूठे हुए दोस्तों से दोस्ती और शांति की बातें करती।

अगर मुझे पता चले
कि मेरा अंतिम समय आ गया है तो क्या मैं,
इन इतनी छोटी-छोटी चीजों को भी नहीं कर पाने के लिए अफसोस करूँगा।

नहीं..

इन सब इच्छाओं को तो
आज ही आराम से पूरा कर सकता हूँ..!

हर दिन,
हर घंटा,
हर मिनट,
हर पल विशेष है,
खास है...बहुत खास है।

प्यारें दोस्तों..!
जिंदगी का लुत्फ उठाइए,
आज में जिंदगी बसर कीजिये।

*क्या पता कल हो न हो*,
वैसे भी कहते हैं न कल तो कभी आता ही नहीं।

*अगर आपको ये मेसेज मिला है*,
इसका मतलब है,
*कि कोई आपकी परवाह करता है*,
केयर करता है,

*क्योंकि शायद आप भी किसी की परवाह करते हैं*,
ध्यान रखते हैं।

*अगर आप*
अभी बहुत व्यस्त हैं,
और,
इसे किसी "अपने" को बाद में या,
*किसी और दिन भेज देंगे*..

*तो याद रखिये*
कोई और दिन बहुत दूर है,
और शायद कभी आए भी नहीं..।

इसलिये
ज़िन्दगी के हर पल को
जियें जी भर के..॥

Sunday, January 29, 2017

*मुख* और *जीभ* का *व्यायाम*

*मुख* और *जीभ* का *व्यायाम*

1. *कच्चा पापड़, पक्का पापड़*

सबसे ज़्यादा फेमस और हमारे दिल के सबसे क़रीब. एक बार में 15 बार बोल के दिखाओ तो जानें.


2. *फालसे का फासला*

चैलेंज है कि 20 बार बिना रुके बोल कर दिखाओ.


3. *पीतल के पतीले में पपीता पीला पीला*

मुस्कुरा का रहे हो, 12 बार इसे बोल कर दिखाओ.


4. *पके पेड़ पर पका पपीता पका पेड़ या पका पपीता*

मेरी जीभ तो लगभग फ्रैक्चर होते-होते बची है.


5. *ऊंट ऊंचा, ऊंट की पीठ ऊंची. ऊंची पूंछ ऊंट की*

क्या हुआ?

6. *समझ समझ के समझ को समझो, समझ समझना भी एक समझ है. समझ समझ के जो न समझे, मेरे समझ में वो ना समझ है.*

इसे एक बार ही बोल के दिखाएँ


7. *दूबे दुबई में डूब गया*

अच्छा ठीक है.ज़्यादा ख़ुश मत हों. ये आपकी फूलती सांसों को आराम देने के लिए था.


8. *चंदु के चाचा ने चंदु की चाची को, चांदनी चौक में, चांदनी रात में, चांदी के चम्मच से चटपटी चटनी चटाई*

अब चाहे जो कुछ भी करना, मगर अपने बाल मत नोंचना.


9. *जो हंसेगा वो फंसेगा, जो फंसेगा वो हंसेगा*

आपको ये आसान लग रहा है. जरा इसे 10 बार से ज़्यादा बार बोल कर दिखाइए.


10. *खड़क सिंह के खड़कने से खड़कती हैं खिड़कियां, खिड़कियों के खड़कने से खड़कता है खड़क सिंह*

मेरे तो पूरे बदन में खड़कन हो रही है.


11. *मर हम भी गए, मरहम के लिए, मरहम न मिला. हम दम से गए, हमदम के लिए, हमदम न मिला*

बोलो-बोलो मुंह मत चुराओ.


12. *तोला राम ताला तोल के तेल में तल गया, तला हुआ तोला तेल के तले हुए तेल में तला गया*

ऐसे देख का रहे होे?


13. *डाली डाली पे नज़र डाली, किसी ने अच्छी डाली, किसी ने बुरी डाली, जिस डाली पर मैने नज़र डाली वो डाली किसी ने तोड़ डाली*

बोलो बोलो...


14. *पांच आम पंच चुचुमुख-चुचुमुख, पांचों मुचुक चुचुक पंच चुचुमुख*

Friday, January 13, 2017

धागे और पतंग जैसे जुड़ाव के सफल संतुलन से मिली हुई ऊंचाई को ही 'सफल जीवन' कहते हैं.!

एक बेटे ने पिता से पूछा :
पापा ये 'सफल जीवन' क्या होता है ?

पिता, बेटे को पतंग उड़ाने ले गए। 
बेटा पिता को ध्यान से पतंग उड़ाते देख रहा था...

थोड़ी देर बाद बेटा बोला ;
पापा.. ये धागे की वजह से पतंग और ऊपर नहीं जा पा रही है, क्या हम इसे तोड़ दें !!  ये और ऊपर चली जाएगी...

पिता ने धागा तोड़ दिया ..

पतंग थोड़ा सा और ऊपर गई और उसके बाद लहरा कर नीचे आइ और दूर अनजान जगह पर जा कर गिर गई...।

तब पिता ने बेटे को जीवन का दर्शन समझाया :
बेटा..
'जिंदगी में हम जिस ऊंचाई पर हैं..
हमें अक्सर लगता की कुछ चीजें, जिनसे हम बंधे हैं वे हमें और ऊपर जाने से रोक रही हैं...
  जैसे :
            घर,
          परिवार,
        अनुशासन,
        माता-पिता,
         गुरू आदि
और हम उनसे आजाद होना चाहते हैं...

वास्तव में यही वो धागे होते हैं जो हमें उस ऊंचाई पर बना के रखते हैं.. इन धागों के बिना हम एक बार तो ऊपर जायेंगे परन्तु बाद में हमारा वो ही हश्र होगा जो  बिन धागे की पतंग का हुआ...'

*"अतः जीवन में यदि तुम ऊंचाइयों पर बने रहना चाहते हो तो, कभी भी इन धागों से रिश्ता मत तोड़ना.."*

*"धागे और पतंग जैसे जुड़ाव के सफल संतुलन से मिली हुई ऊंचाई को ही 'सफल जीवन' कहते हैं.!"*

*मकर संक्रान्ति की बधाई...*

Monday, January 9, 2017

इस धरती पर कोई ऐसा अमीर अभी तक पैदा नहीं हुआ जो बीते हुए समय को खरीद सके

*एक गिलहरी रोज अपने काम पर समय से आती थी और अपना काम पूरी मेहनत और ईमानदारी से करती थी !*
गिलहरी जरुरत से ज्यादा काम कर के भी खूब खुश थीl
*क्योंकि उसके मालिक, जंगल के राजा शेर ने उसे दस बोरी अखरोट देने का वादा कर रखा था।*
गिलहरी काम करते करते थक जाती थी तो सोचती थी , कि थोडी आराम कर लूँ , वैसे ही उसे याद आता कि शेर उसे दस बोरी अखरोट देगाl
गिलहरी फिर काम पर लग जाती !
गिलहरी जब दूसरे गिलहरीयों को खेलते देखती थी, तो उसकी
भी इच्छा होती थी कि मैं भी खेलूं , पर उसे अखरोट याद आ जाता,
और वो फिर काम पर लग जाती !

*ऐसा नहीं कि शेर उसे अखरोट नहीं देना चाहता था, शेर बहुत ईमानदार था !*

ऐसे ही समय बीतता रहा....
एक दिन ऐसा भी आया जब जंगल के राजा शेर ने गिलहरी को दस बोरी अखरोट दे कर आज़ाद कर दिया !

*गिलहरी अखरोट के पास बैठ कर सोचने लगी कि अब अखरोट मेरे किस काम के ?*

पूरी जिन्दगी काम करते - करते दाँत तो घिस गये, इन्हें खाऊँगी कैसे !

*यह कहानी आज जीवन की हकीकत बन चुकी है !*

इन्सान अपनी इच्छाओं का त्याग करता है, पूरी ज़िन्दगी नौकरी, व्योपार, और धन कमाने में बिता देता है !
*60 वर्ष की उम्र में जब वो सेवा निवृत्त होता है, तो उसे उसका जो फन्ड मिलता है, या बैंक बैलेंस होता है, तो उसे भोगने की क्षमता खो चुका होता हैl*

तब तक जनरेशन बदल चुकी होती है, परिवार को चलाने वाले बच्चे आ जाते है।

क्या इन बच्चों को इस बात का अन्दाजा लग पायेगा की इस फन्ड, इस बैंक बैलेंस के लिये : -
*कितनी इच्छायें मरी होंगी ?*
*कितनी तकलीफें मिली होंगी ?*
*कितनें सपनें अधूरे रहे होंगे ?*

क्या फायदा ऐसे फन्ड का, बैंक  बैलेंस का, जिसे पाने के लिये पूरी ज़िन्दगी लग जाये और मानव उसका
भोग खुद न कर सके !

*इस धरती पर कोई ऐसा अमीर अभी तक पैदा नहीं हुआ जो बीते हुए समय को खरीद सके।*

इसलिए हर पल को खुश होकर जियो व्यस्त रहो, पर साथ में मस्त
रहो सदा स्वस्थ रहो।

*BUSY पर BE-EASY भी रहोl*

Saturday, December 31, 2016

समझ में नहीं आता कि दोनों में साधु कौन है

गुणों  की  धारणा  ही   सच्चा  श्रृंगार  है  ... 

→ एक साधु नदी किनारे, धोबी के कपड़े धोने के एक पत्थर पर खड़े - खड़े ध्यान करने लगे । इतने में धोबी गधे पर कपड़े लादे वहाँ आया । उसने साधु को देखा तो प्रतीक्षा करने लगा कि धुलाई के पत्थर से साधु हटे और वह अपना काम शुरू करे । कुछ देर प्रतीक्षा करने पर भी जब साधु नहीं हटे तो उसने प्रार्थना की, महात्मा जी, आप पत्थर से हटकर खड़े हो जाएँ तो मैं अपने काम में लगूँ । धोबी की बात साधु ने अनसुनी कर दी

धोबी ने फिर प्रार्थना की किन्तु साधु ने इस बार भी ध्यान नहीं दिया ।  अब धोबी ने साधु का हाथ पकड़ कर धीरे से उन्हें पत्थर से उतारने की कोशिश की । धोबी द्वारा हाथ पकड़े जाने पर साधु को अपमान महसूस हुआ । उन्होंने धोबी को धक्का दे दिया । साधु का क्रोध देखकर धोबी की श्रद्धा भी समाप्त हो गई । उसने भी साधु को धक्का देकर पत्थर से हटा दिया ।
अब तो साधु और धोबी आपस में भीड़ गए । धोबी बलवान था अतः उसने साधु को उठाकर फेंक दिया । साधु भगवान से प्रार्थना करने लगा, हे भगवान, मैं इतने भक्ति - भाव से रोज आपकी पूजा करता हूँ फिर भी आप मुझे इस धोबी से छुड़ाते क्यों नहीं ? जवाब में साधु ने आकाशवाणी सुनी, तुम्हें हम छुड़ाना चाहते हैं किन्तु समझ में नहीं आता कि दोनों में साधु कौन है और धोबी कौन ? यह सुन साधु का धमण्ड चूर हो गया । उसने धोबी से क्षमा मांगी और सच्चा साधु बन गया ।

दरअसल वेश धारण करने से नहीं बल्कि सदगुणों को आचरण में उतारने से साधुता आती है ।

धन से सम्मपन्न होना तो सरल एवं सहज है लेकिन गुणों से सम्मपन्न होना मुश्किल है क्योंकि मनुष्य बुराइयों को छोड़ने और अच्छाइयों एवं गुणों को ग्रहण करने में अपने आपको कमजोर समझते हैं और इस कमजोरी के कारण गुणों को देखने के स्थान पर दूसरों के दोष देखने लगते हैं । इसका सीधा - सा मतलब है कि व्यक्ति अपनी कमी - कमजोरी छिपाने के लिए दूसरों की कमी को देखते हैं । इसलिए हर मनुष्य अमृतवेले उठते ही कोई भी एक अच्छा कार्य करने का संकल्प ले और रात को सोते समय एक बुराई का त्याग करके सोए । जो ऐसा करते हैं वे गुणग्राही बन जीवन को गुणों से सम्मपन्न बना लेते है ।